जिला परिषद करौली में संचालित ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग की योजनाऐं

- ::: केन्‍द्र प्रवर्तित योजनाएं:::-

क्रम संख्‍या

योजना का नाम

संक्षिप्‍त नाम

विशेष

1. स्‍वर्ण जयन्‍ती ग्राम स्‍वरोजगार योजना S.G.S.Y प्रगति रिपोर्ट
2. महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारन्‍टी योजना MG-NREGS प्रगति रिपोर्ट
3. इन्दिरा आवास योजना IAY प्रगति रिपोर्ट
4. सांसद स्‍थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम MPLAD प्रगति रिपोर्ट
5. प्राथमिक शिक्षा हेतु राष्‍ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम MDM प्रगति रिपोर्ट

- ::: राज्‍य प्रवर्तित योजनाएं :::-

क्रम संख्‍या योजना का नाम संक्षिप्‍त नाम विशेष
1. विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना MLA LAD प्रगति रिपोर्ट
2. ग्रामीण जन भागीदारी विकास योजना GJBVY प्रगति रिपोर्ट
3. डांग क्षेत्रिय विकास कार्यक्रम DANG प्रगति रिपोर्ट
4. मुख्‍यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना MMBPLAY प्रगति रिपोर्ट
5. सम्‍पूर्ण स्‍वच्‍छता अभियान TSC प्रगति रिपोर्ट
6. पिछडा क्षेत्र विकास निधी BRGF प्रगति रिपोर्ट

जिला परिषद मुख्‍य पृष्‍ठ (ZP HomePage)


स्‍वर्ण जयन्‍ती ग्राम स्‍वरोजगार योजन
  (
एस.जी.एस.वाई)

संक्षिप्‍त परिचय :-

                 भारत सरकार द्वारा 1 अप्रेल 1999 से स्‍वर्णजयन्‍ती स्‍वरोजगार योजना (एस.जी.एस.वाई)आरम्‍भ क गई है। पूर्व मे क्रियान्वित किये जा रहे विभिन्‍न कार्यक्रम/योजनाऐं यथा-एकीकृत ग्रामीण विकास कायक्रम  (आई.आर.डी.पी) ग्रामीण युवाओं को स्‍वरोजगार हेतु प्रशिक्षण  (ट्रायसम) योजना, ग्रामीण दस्‍तकारों को उन्‍नत औजार-किट आपूर्ति  (सिट्रा) योजना, ग्रामीण क्षेत्रों मे महिला व व बाल विकास कार्यक्रम  (द्वाकरा) गंगा कल्‍याण योजना  (जीकेवाई) एवं दस लाख कुओं की योजना  (एम.डब्‍ल्‍यू.एस) 01.04.1999 से बंद कर दिया गया। इन सभी 6 योजनाओं के स्‍थान पर 01.04.1999 से स्‍वर्णजयन्‍ती ग्राम स्‍वरोजगार योजना प्रारम्‍भ की गई है। स्‍वर्णजयन्‍ती ग्राम स्‍वरोजगार योजना एक सर्वागीण कार्यक्रम के रूप मे स्‍वरोजगार के सभी पहलुओं को सम्मिलित करती है। इसके अन्‍तर्गत चयनित मुख्‍य गतिविधियों के क्‍लस्‍टर बनाने, गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने, उनकी क्षमता विकसित करने के साथ ही प्रशिक्षण, अवसरंचना, प्रोधगिकी, साख एवं विपणन के क्षेत्रों को विकसित किये जाने का प्रावधान है।

              इस योजना का मुख्‍य उददेश्‍य गरीबी रेखा के नीचे  (बी.पी.एल) जीवनयापन कर रहे चयनित परिवारों को साख व अनुदान द्वारा आय-व़द्वि करने वाली परिसम्‍पत्तियां उपलब्‍ध कराकर उन्‍हे गरीबी की रेखा से उपर उठाना है।

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महात्‍मां गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्‍टी अधिनियम
       (
एम.जी.एन.आर.जी.ए. 2005)

-: सामान्‍य परिचय :-

   -: विशेषताऐं :-

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-: इन्दिरा आवास योजना :-

-:: संक्षिप्‍त विवरण ::-

        मानव के जीवन निर्वाह के लिए आवास बुनियादी जरूरतों में से एक है। एक साधारण नागरिक के लिये आवास उपलब्‍ध होने से आर्थिक सुरक्षा और समाज में प्रतिष्‍ठा मिलती है। ग्रामीण क्षेत्रों में गरी लोगों को आवास उपलब्‍ध कराने की जिम्‍मेदारी  ग्रामीण विकास मन्‍त्रालय, भारत सरकार को सौपी गई है। भारत सरकार द्वारा सम्‍पूर्ण देश में एक जनवरी 1996 से एक स्‍वतन्‍त्र योजना के रूप में '' इन्दिरा आवास योजना'' को क्रियान्वित कराया जा रहा है। भारत सरकार के निर्देशों से राज्‍य के ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्‍येक जिले में बीपीएल सेन्‍सस 2002 में चयनित परिवारों में से आवासहीन ( '' 0 '' कोड)  के 215550 परिवारों एवं कच्‍चे आवास ( '' 1'' कोड ) के 1570151 परिवारों की इस प्रकार कुल 1785701 परिवारों की एक स्‍थाई प्रतिक्षा सूची नाई गई, जिसे '' इन्दिरा आवास की स्‍थाई प्रतीक्षा सूची'' कहा गया है। अर्थात राज्‍य के कुल 1785701 बीपीएल परिवारों को इन्दिरा आवास की आवश्‍यकता का आंकलन किया गया। जिलों में ऐसे बीपीएल परिवार जिनका नाम किन्‍ही कारणों से बीपीएल की चयनित सूची में जोडने से रह गया है। ऐसे परिवारों हेतु राज्‍य के प्रत्‍येक जिलों में एक सतत प्रक्रिया जारी है। जिसके अन्‍तर्गत उपखण्‍ड अधिकारी को अपील प्रस्‍तुत कर नाम जुडवाने हेतु आवेदन किया है। पात्रता होने पर उस परिवार का नाम चयनित बीपीएल सूची 2002 में सम्मिलित कर लिया जाता है।

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सांसद स्‍थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम
(
एम.पी.एल.ए.डी)

-: संक्षिप्‍त परिचय :- 

                     सांसद स्‍थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अन्‍तर्गत प्रत्‍येक लोकसभा व राज्‍यसभा सदस्‍य की अभिशंषा पर उनके क्षेत्र में आवश्‍यकता के आधार पर विकासात्‍मक प्रक़ति की परिसम्‍पत्तियां का निर्माण कराने का प्रावधान है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 1993-94 मे प्रारम्‍भ की गई इस योजना में प्रत्‍येक सांसद/राज्‍यसभा सदस्‍य के लिये 1.00 करोड रूपये निर्धारित थे जिन्‍हे बढाकर वर्ष 1998-99 से 2.00 करोड रूपये कर दिया गया है। योजना का प्रमुख उददेश्‍य स्‍थानीय आवश्‍यकताओं पर आधारित विकासात्‍मक प्रकृति के निर्माण कार्य एवं टिकाउ परिसम्‍पत्तियों का सृजन करना है।

मुख्‍य बिन्‍दु :-

  1.  इस योजना हेतु सम्‍पूर्ण राशि केन्‍द्र सरकार से प्राप्‍त होती है।

  2. योजनान्‍तर्गत करवाये जाने वाले कार्यो के प्रस्‍ताव सांसद द्वारा अभिशंषित कर, जिला कलक्‍टर को प्रस्‍तुत किये जाते है। तत्‍पश्‍चात इन कार्यो की कार्यक्रम के दिशा-निर्देशानुसार जांच कर कार्य करवाये जाते है।

  3. सांसद द्वारा देश के किसी भी भाग में प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ, चक्रवात, सुनामी, भूकम्‍प, तूफान, अकाल,  आदि की स्थिति में अपने कोटे से 10.00 लाख रूपये के कार्यो की अभिशंषा मार्गदर्शिका में अनुमत कार्यो हेतु की जा सकती है।

  4. देश मे‍ विकराल प्राकृतिक आपदा आने पर सांसद प्रभावित जिले के लिये अधिकतम 50.00 लाख रूपये के कार्यो की अभिशंषा कर सकते है।

  5. यदि कोई निर्वाचित संसद सदस्‍य उस राज्‍य/संघ शासित क्षेत्र जिससे वह चुना गया है, की शिक्षा एवं संस्‍कृति का प्रचार दूसरे राज्‍य/संघ शासित क्षेत्र मे करना चाहता है तो एक वित्‍तीय वर्ष में अधिकतम 10.00 लाख रूपये शिक्षा एवं संस्‍कृति से सम्‍बन्धित कार्य जो मार्गदर्शिका मे प्रति‍बंधित नही है का चयन कर सकता है।

  6. राज्‍य के ग्रामीण/शहरी क्षेत्र मे लागू है।

  7. निर्माण कार्य पंचायती राज/ स्‍वायत्‍तशासी निकाय/राज्‍य सरकार के संबन्धित विभाग एवं विशेष विधि के तहत गठित निगम बोर्ड आदि द्वारा कराये जाते है।

  8. योजनान्‍तर्गत निधियों मे से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोगों के निवास क्षेत्रों के लिये क्रमश: कम से कम 15 प्रतिशत और 7.5 प्रतिशत लागत के कार्यो की अभिशंषा करने का प्रावधान है।

  9. योजनान्‍तर्गत निर्मित करायी जाने वाली परिसम्‍पत्तियां के रख-रखाव और अनुरक्षण की व्‍यवस्था सम्‍बन्धित लाभार्थी संस्‍था की होगी।

  10. योजना के तहत सांसद द्वारा प्रस्‍तावित कार्यो के प्राप्‍त होने की दिनांक से यथा संभव 45 दिनों के अन्‍दर प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्‍तीय स्‍वीकृति जारी करने की व्‍यवस्‍था की गई है।
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योजनान्‍तर्गत प्रतिबन्धित कार्यो की सूची :-

  1. केन्‍द्र राज्‍य सरकार उनके विभागों, सरकारी अभिकरणों/संगठनों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से सम्‍बन्‍ध कार्यालय तथा रिहायशी भवन।

  2. कार्यालय तथा रिहायशी भवन तथा निजी, सहकारी और वाणिज्यिक संगठनों से संबद्ध अन्‍य कार्य।

  3. ऐसे सभी कार्य जिनमें वाणिज्यिक प्रतिष्‍ठान/इकाई शामिल हो।

  4. किसी भी प्रकार के सभी रख-रखाव वाले कार्य।

  5. भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण द्वारा उपलब्‍ध विशेष अनुमति वाली सम्‍पत्ति तथा पुरातात्विक स्‍मारक तथा भवनों को छोडकर सभी नवीनीकरण तथा मरम्‍मत कार्य।

  6. किसी भी केन्‍द्र तथा राज्‍य/संघ शासित क्षेत्र राहत कोष को अंशदान, अनुदान, तथा .ऋण।

  7. किसी व्‍‍यक्ति के नाम पर रखी गई सम्‍पत्ति।

  8. केन्‍द्र राज्‍य तथा संघ शासित क्षेत्र तथा स्‍थानीय स्‍वशासन से सम्‍बद्ध वाहन, अर्थमूवर, तथा अस्‍पताल उपकरण, शैक्षणिक, खेल, पेयजल, तथा सफाई, उददेश्‍यों को छोडकर सभी चल वस्‍तुओं की खरीद (यह कार्य जिसके लिये ऐसी वस्‍तुओं का प्रस्‍ताव हो, पूंजी लागत के 10 प्रतिशत के अध्‍याधीन होगा) ।

  9. भूमि अधिग्रहण तथा अधिग्रहित भूमि का मुआवजा।

  10. किसी भी प्रकार के कार्य अथवा मद की समाप्ति अथवा आंशिक समाप्ति की अदायगी।

  11. व्‍यक्तिगत/पारिवारिक लाभ हेतु सम्‍पत्ति।

  12. समस्‍त राजस्‍व और आवर्ती व्‍यय।

  13. धार्मिक पूजन से संबद्ध स्‍थल तथा धार्मिक आस्‍था/ समूह द्वारा अधिग्रहित भूमि के अन्‍तर्गत कार्य।

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प्राथमिक शिक्षा हेतु राष्‍ट्रीय पोषाहार सहायता कार्यक्रम
   (मिड-डे-मील)

-: परिचय:-

            मिड-डे- मिल कार्यक्रम के अन्‍तर्गत जिले के सभी पांचों पंचायत समितियों तथा तीनों नगरपालिकाओं अंतर्गत समस्‍त राजकीय, राज्‍य अनुदानित शालाओं, शाखाओं, स्‍थानीय निकायों द्वारा संचालित विद्यालयों, शिक्षा  गारन्‍टी केन्‍द्रों तथा मदरसो में कक्षा 1 से 5 में अध्‍ययनरत छात्रों को कम से कम 300 केलोरी एवं 8 से 12 ग्राम प्रोटीन युक्‍ 100 ग्राम खाघान्‍न से निर्मित् पका हुआ भोजन प्रति शैक्षणिक दिवस उपस्थित छात्रों को उपलब्‍ध करवाया जा रहा है। पूर्व में इस कार्यक्रम का क्रियान्‍वयन पंचायती राज विभाग द्वारा किया जा रहा था। 16 दिस्‍मबर, 2005 से कार्यक्रम का प्रशासनिक विभाग ग्रामीण विभाग  कर दिया गया है। कार्यक्रम का उददेश्‍य प्राथमिक शिक्षा का सार्वजनीकरण, बच्‍चों का शाला में नामांकन एवं ठहराव सुनिश्चित करना तथा पौष्टिक आहार उपलब्‍ध कराना है।

-: मुख्‍य बिन्‍दु : -

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विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम
( एम.एल.ए. एल. ए. डी. )

-: परिचय :-

            राजस्‍थान राज्‍य में प्रत्‍येक विधान सभा क्षेत्र में स्‍थानीय आवश्‍यकता के अनुरूप स्‍थानीय विधायक गण की अभिशंषा पर जनोपयोगी कार्यों का निर्माण कराने हेतु वर्ष 1999 -2000 में विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम के नाम से एक नवीन योजना प्रारंभ की गयी। इस योजना के तहत प्रत्‍येक विधायक महोदय अपने -अपने  विधानसभा क्षेत्र में स्‍थानीय आवश्‍यकतानुसार वर्ष 1999 . 2000 में 25.50 लाख रूपये की लागत के कार्य अभिशांसित करने के लिये अधिकृत थे परन्‍तु राज्‍य सरकार द्वारा वर्ष 2000.2001 के लिये प्रत्‍येक विधायक को 40.00 लाख रूपये एवं वर्ष 2001-2002 से प्रति विधायक 60.00 लाख रूपये की लागत के कार्य अभिशंसित करने के लिये अधिकृत किया गया है। कार्यक्रम का उददेश्‍य स्‍थानीय आवश्‍यकता के अनुरूप जनोपयोगी परिसम्‍पत्तियों का निर्माण कराना। क्षेत्रीय विकास से असंतुलन को दूर करना। स्‍थानीय समुदाय में स्‍वावलम्‍बन एवं आत्‍मविश्‍वास को प्रोत्‍साहन देना ।

-: मुख्‍य बिन्‍दु :-

-: योजनान्‍तर्गत कराए जाने वाले कार्य :-

                राज्‍य के ग्रामीण /शहरी क्षेत्र में सामुदायिक उपयोग में लिये जाने वाले निम्‍न प्रक़ति के पंचायतीराज संस्‍था/स्‍थानीय स्‍वायत्‍तशाषी निकाय/ राजकीय स्‍वामित्‍व के निर्माण कार्य निष्‍पादित कराये जा सकेंगे।
 

  1. सम्‍पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना की मार्ग दर्शिकाओं के अन्‍तर्गत स्‍वीकृत हो सकने वाले सामुदायिक उपयोग के कार्य।

  2. पेयजल के कार्य।

  3. किसी ग्राम/नगर की आबादी सीमा में सडक (ग्रेवल/मेटल/डामर/सीमेन्‍ट/खंरजा एवं नाली निर्माण।

  4. शहरी क्षेत्र मे सिवरेज का कार्य ।

  5. (अ) चि‍कित्‍सालय /स्‍वास्‍थ्‍या केन्‍द्र / उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के भवन ।  (ब्) शिक्षण संस्‍थाओ के भवन / कम्‍प्‍यूटर शिक्षा हेतु कम्‍प्‍यूटर / अध्‍ययन-अध्‍यापन सामग्री / स्‍काउट सामग्री / खेल सामग्री / फर्नीचर /दरी  
    (स)सहायता प्राप्‍त शिक्षण संस्‍थाओ तथा गैर साहयता प्राप्‍त परन्‍तु मान्‍यता प्राप्‍त शिक्षण संस्‍थाओ के भवन बशर्तें वे शिक्षण संस्‍थाये कम से कम दो वर्ष से अस्तित्‍व में हो /(द) सहायता प्राप्‍त शिक्षण संस्‍थाओ की शिक्षा के लिये कम्‍प्‍यूटर /

  6. ग्रेवल/डब्‍ल्‍यू .बी. एम. / डामर / सीमेन्‍ट सडक के कार्य ।

  7. ग्राम / शहर में तालाबों की सफाई / डिसिल्टिंग का कार्य ।

  8. पारम्‍परिक जलस्‍त्रोतों के विकास के कार्य ।

  9. गांवो में सम्‍पर्क सडक / रास्‍तों के लिये पुलिया/रपट का कार्य ।

  10. पर्यटन स्थलों के लिये आधारभू‍त सुविधाओ का कार्य।

  11. पशुधन के लिये पीने के पानी की सुविधा विकसित करने का कार्य ।

  12. पशु स्‍वास्‍थ्‍य के लिये चिकित्‍सालय/डिस्‍पेन्‍सरी भवन का निर्माण।

  13. चिकित्‍सालय हेतु चिकित्‍सा उपकरण/एम्‍बूलेंस, पंचायती राज संस्‍थाओं द्वारा आदिवासी क्षेत्रों मे चलते फिरते दवाखानो की व्‍यवस्‍था, रेकक्रास/रामकृष्‍ण मिशन जैसी प्रतिष्ठित संस्‍थाओं के लिये एम्‍बूलेंस।

  14. शमशान/ कब्रिस्‍तान आदि की चारदीवारी एवं सुविधाओं विकसित करने का कार्य।

  15. पुस्‍तकालय भवन/ बस स्‍टैण्‍ड/ धर्मशाला/ विश्रामगृह/ स्‍टेडियम/बालमीकि भवन/ सामुदायिक भवन।

  16. विघुतीकरण।

  17. सार्वजनिक/सरकारी स्‍वामित्‍व के योजनान्‍तर्गत निर्मित भवन निर्माण के मरम्‍मत कार्य।
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  18. चारदीवारी निर्माण।

  19. स्‍पोर्टस कॉम्‍पलैक्‍स।

  20. जनोपयोगी कार्य।

  21. अन्‍य योजनाओ मे स्‍वीकृत किन्‍तु राशि के अभाव में अपूर्ण कार्य।

  22. जिला परिषदों( ग्राविप्र) /पंचायती राज संस्‍थाओं हेतु फैक्‍स मशीन/कम्‍प्‍यूटर।

  23. सामुदायिक जलोत्‍थान सिंचाई योजना।

  24. राजस्थान सरकार के स्‍वीकृत अदालत भवन/कार्यालय भवन/पंचायत राज संस्‍थाओं  के निर्माण का  कार्य।

  25. इलैक्‍ट्रोनिक परियोजना - सूचना फुटपाथ, माध्‍यमिक विधालयों मे हैम क्‍लब, सिटीजन बैण्‍ड रेडियों,  ग्रन्‍थ सूची-डाटावेस परियोजनाऐं।

  26. स्‍थानीय निकाय मे नाईट सॉयल डिस्पोजल सिस्‍टम।

  27. जयपुर मुख्‍यालय पर सूचना केन्‍द्र परिसर मे निर्मित होने वाले स्‍वतंत्रता सेनानियों के लिये स्‍मृति भवन व अनुसंधान केन्‍द्र का निर्माण।

  28. राजस्‍थान सरकार द्वारा अनुमोदित स्‍ववित्‍त पोषित योजनान्‍तर्गत विद्ममान राजकीय उच्‍च् माध्‍यमि‍क विद्यालयों व महाविद्यालयों में नवीन प्रारंभ करने के लिए सम्‍बन्धित विद्यालय विकास समिति/ कालेज विकास समिति द्वारा 3 द्वारा अनुमोदित स्‍ववित्‍त पोषित योजनान्‍तर्गत विघमान राजकीय उच्‍च माध्यमिक विद्यालयों व महाविद्यालयों में‍ नवीन विषय प्रारंभ करने के लिये सम्‍बन्धित विद्यालय विकास समिति/ कॉलेज विकास समिति द्वारा 3 वर्ष लिए आवश्‍यक आवर्ती व्‍यय हेतु इकठठी राशि की व्‍यवस्‍था की जाती है। परन्‍तु इसमें यदि कोई कमी हो तो विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजना मद की राशि भी उपयोग में ली जा सकेंगी।

  29. राजस्‍थान सरकार द्वारा अनुमोदित स्‍व- वित्‍त पोषित योजनान्‍तर्गत विद्यमान राजकीय उच्‍च मा‍ध्‍यमिक विद्यालयों में नवीन संकाय/ विषय प्रारम्‍भ करने के लिए सम्‍बन्धित विद्यालय विकास समिति द्वारा 3 वर्ष के लिए आवश्‍यक आवर्ती व्‍यय हेतु इकटठी राशि की व्‍यवस्‍था की जानी है परन्‍तु इसमें यदि कोई कमी हो तो विधायक स्‍थानीय क्षेत्र योजना मद की राशि भी उपयोग में ली जा सकती है।

  30. राज्‍य पुलिस कर्मी आवासीय भवन निर्माण का कार्य अकाल प्रभावित क्षेत्रों में श्रम मद अकाल राहत से दिये जाने की शर्तें पर सामग्री मद विधायक स्‍थानीय क्षेत्र विकास योजनान्‍तर्गत स्‍वीकृत किये जा सकेंगे।

  31. अतिरिक्‍त पुलिस अधीक्षक कार्यालय/ उप अधीक्षक कार्यालय एवं थानों के लिए कम्‍प्‍यूटर मय लेजर प्रिंटर, स्‍कैनर, एवं फैक्‍स कार्य क्रय करने हेतु एक मुश्‍त राशि ( अनावर्ती व्‍यय..)।

  32. उपखण्‍ड कार्यालयों के लिए कम्‍प्‍यूटर मय प्रिंटर व फैक्‍स मशीन क्रय करने हेतु एक मुश्‍त राशि (अनावर्ती)।

-:योजनान्‍तर्गत न कराये जा सकने वाले कार्य : -

 

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ग्रामीण जन भागीदारी विकास योजना
   ( जी. जे. बी. वी. वाई.)
दिशा निर्देश - परिपत्र

1.0   प्रस्‍तावना :-

1.1    राजस्‍थान में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास एवं रोजगार सृजन तथा सामुदायिक परिसम्‍पत्तियों के निर्माण एवं रख-रखाव में स्‍थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ''ग्रामीण जन भागीदारी विकास योजना'' वर्ष 2010-11 से प्रारम्‍भ करने की माननीय मुख्‍यमंत्री द्वारा बजट भाषण में घोषणा के क्रम में लागू की जा रही है। योजनान्‍तर्गत विकास कार्यों का चयन जन समुदाय की आवश्‍यकता के अनुसार किया जाकर कार्य करवाये जायेंगे।

2.0   योजना के उद्देश्‍य :-

2.1   गांव के विकास के लिए आवश्‍यक सामुदायिक परिसम्‍पत्तियों का निर्माण।

2.2   रोजगार के अतिरिक्‍त अवसरों का सृजन।

2.3   स्‍थानीय समुदाय में स्‍वावलम्‍बन एवं आत्‍मनिर्भरता को प्रोत्‍साहन।

2.4   सामुदायिक परिस्थितियों के निर्माण एवं रख-रखाव में स्‍थानीय समुदाय की भागीदारी को प्रोत्‍साहन।

2.5   ग्रामीण क्षेत्र के परिवारों के जीवन स्‍तर में सुधार।

3.0   योजना की विशेषताऐं :-

3.1   यह राज्‍य वित्‍त पोषित योजना है एवं केवल राज्‍य के ग्रामीण क्षेत्रों में ही लागू होगी।

3.2   इस योजना के तहत नवीन कार्य स्‍वीकृत किए जायेंगे। विशेष परिस्थिति में यह अन्‍य योजनान्‍तर्गत निर्माणाधीन/अपूर्ण कार्यों को
इस योजनान्‍तर्गत सम्मिलित किया जा सकेगा।

3.3   इस योजनान्‍तर्गत प्रस्‍तावित कार्य का वित्‍त पोषण निम्‍नानुसार होगा।                                             

    राज्‍यांश जन सहयोग

(i)       

शमशान एवं कब्रिस्‍तान भूमियों की चारदीवारियों का निर्माण     90 प्रतिशत  10 प्रतिशत
(ii) अन्‍य कार्य ::--    
  (अ)   सामान्‍य क्षेत्र  70 प्रतिशत  30 प्रतिशत
  (ब)   अनुसूचित जाति एवं जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्र 80 प्रतिशत  80 प्रतिशत  20 प्रतिशत

3.4   जनसहयोग की राशि का वहन स्‍थानीय समुदाय/सामाजिक संगठन/गैर सरकारी संस्‍था/ट्रस्‍ट/पंजीकृत संस्‍था/व्‍यक्तिगत दानदाता द्वारा किया जा सकेगा। जनसहयोग की राशि पंचायत समिति/जिला परिषद में नदक/डिमाण्‍ड ड्राफ्ट में जमा करायी जा सकेगी।

4.0   कार्यों के प्रस्‍ताव :-

4.1   इस योजना के अन्‍तर्गत शमशान एवं कब्रिस्‍तान भूमियों की चारदीवारियों का निर्माण प्रथम प्राथमिकता के रूप में कराये जावेंगे। इस श्रेणी के किसी भी कार्य का प्रस्‍ताव जिले में न होने पर ही स्‍थानीय समुदाय के लाभ एवं उपयोगिता का कोई भी कार्य कराया जा सकता है, जिससे सामुदायिक परिसम्‍पत्तियों/सुविधाओं का सृजन हो एवं गांव में त्‍वरित आर्थिक एवं सामाजिक विकास का मार्ग प्रशस्‍त हो।

4.2   योजनान्‍तर्गत नहीं कराये जा सकने वाले कार्य :-

(अ)   अनुदान एवं ऋण।

(ब)   वाणिज्यिक संगठन/निजी संस्‍था के लिए परिसम्‍पत्ति।

(स)   भूमि के अधिग्रहण एवं अधिग्रहित भूमि के लिए मुआवजा।

(द)   व्‍यक्तिगत लाभ के लिए परिसम्‍पत्ति।

(य)   धार्मिक पूजा स्‍थल।

(र)   योजना में जातिगत व धार्मिक आधार पर सामुदायिक भवन अनुमत नहीं होगें।

4.3   कार्यों की स्‍वीकृतियां आवंटित राशि की सीमा तक ही जारी की जावेगी ताकि कोई देनदारियां योजनान्‍तर्गत लम्बित नहीं रहे।

4.4   इस योजना के तहत प्रस्‍तावित कार्य, विकासात्‍मक प्रकृति एवं सामुदायिक उपयोग के होने पर स्‍वीकृत किए जायेंगे तथा टिकाउ- परिसम्‍पत्तियों पर अधिक जोर दिया जावेगा। आवृत्ति व्‍यय हेतु कोई राशि स्‍वीकृत नहीं की जावेगी।

4.5   सृजित होने वाली परिसम्‍पत्ति का स्‍वामित्‍व राज्‍य सरकार/पंचायती राज संस्‍था में निहित होगा एवं उसका इन्‍द्राज पंचायत के परिसम्‍पत्ति रजिस्‍टर में करना अनिवार्य होगा।

5.0   जन सहयोग :-

5.1   निर्धारित जन सहयोग की पूर्ण राशि एक मुश्‍त ही स्‍वीकृति से पूर्व पंचायत समिति/जिला परिषद में जमा करानी होगी।

5.2   ग्रामवासियों द्वारा जन सहयोग नकद के रूप में ही दिया जावेगा।

5.3   राजकीय विधालयों में ग्रामीण जन भागीदारी विकास योजनान्‍तर्गत उसी विधालय के भवन निर्माण/अतिरिक्‍त कक्षा-कक्ष के निर्माण के लिए योजना में देय निर्धारित जन सहयोग के पेटे छात्र निधि कोष का उपयोग किया जा सकेगा।  

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डांग क्षेत्रिय विकास  कार्यक्रम 

-: परिचय : -

        डांग क्षेत्रीय विकास कायक्रम वर्ष 1995- 96 से 2000- 01 तक राज्‍य के 8 जिलों यथा सवाईमाधौपुर, करौली, कोटा, बून्‍दी, बारा, धौलपुर, भरतपुर एवं झालावाड की 21 पंचायत समितियों की 357 ग्राम पंचायतों में संचालित रहा। वर्ष 2001-02 से वित्‍तीय प्रावधान नहीं होने से यह कार्यक्रम बन्‍द कर दिया गया परन्‍तु डांग क्षेत्र के सर्वागीण विकास को द़ष्टिगत रखते हुये वर्ष 2004-05 के बजट में डांग विकास परियोजना को उक्‍त आठ जिलों में पुन: प्रारम्‍भ करने की घोषणा की, योजना का उददेश्‍य दस्‍युओं से प्रभावित डांग क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास एवं अतिरिक्‍त रोजगार के अवसर उपलब्‍ध कराना है।

-: मुख्‍य बिन्‍दु :-

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मुख्‍यमंत्री ग्रामीण बी.पी.एल. आवास योजना

                    राज्‍य के ग्रामीण क्षेत्र के चयनित बीपीएल परिवारों में आवासों की कमीं पर राज्‍य मंत्री परिषद की बैठक दिनांक 30.11.2009 एवं 01.12.2009 में चिन्‍तन व मंथन कर आगामी वर्षों में आवासों की कमीं को कम करने का निर्णय लिया गया।

                    राज्‍य में ग्रामीण बीपीएल आवासों की लम्बित मांग को ध्‍यान में रखते हुए इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर राजस्‍थान विधानसभा में माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा प्रस्‍तुत बजट 2011-12 के बजट भाषण में इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर ''मुख्‍यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना'' लागू करने की घोषणा की है। यह योजना राज्‍य में 2011-12 से 2013-14 तक लागू रहेगी। इस प्रकार योजना के अन्‍तर्गत आगामी तीन वर्षों में लगभग 6 लाख 80 हजार ग्रामीण बीपीएल परिवारों को आवास उपलब्‍ध कराने की लक्ष्‍य रखा है।

  1. मुख्‍यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना :- ''इंदिरा आवास योजना'' की तर्ज पर ''मुख्‍यमंत्री ग्रामीण बीपीएल आवास योजना'' पूरे राज्‍य के ग्रामीण क्षेत्र में क्रियान्वित कराई जायेगी। राज्‍य सरकार की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में आवास उपलब्‍ध कराने की यह एक प्रमुख योजना है। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित ''इंदिरा आवास योजना'' की क्रियान्विति भी राज्‍य के ग्रामीण क्षेत्रों में पूर्व की भांति चालू रहेगी।

  2. उद्देश्‍य :- योजना का मुख्‍य उद्देश्‍य अनुसूचित जाति/जनजाति, मुक्‍त बंधुआ मजदूरों के सदस्‍यों, अल्‍पसंख्‍यकों एवं गैर अनुसूचित जाति/जनजाति के गरीबी रेखा के नीचे ग्रामीण परिवारों को इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर वित्‍तीय सहायता देकर नवीन आवासीय इकाईयों के निर्माण में मदद करना है।

  3. वित्‍त पोषण प्रणाली :- इस योजना के वित्‍त पोषण हेतु जिला परिषदों द्वारा हुडको(HUDCO)से ऋण लिया जावेगा, परन्‍तु लाभार्थियों को यह राशि नवीन आवास निर्माण हेतु अनुदान सहायता के रूप में ''इंदिरा आवास योजना'' की तर्ज पर उपलब्‍ध कराई जाएगी। हुडकों(HUDCO) द्वारा जिला परिषदों को इस आवासीय योजना में उपलब्‍ध कराए जाने वाले ऋण की ब्‍याज दर पर FLOATING रहेगी। ऋण का पुर्नभुगतान हुडको(HUDCO) द्वारा निर्धारित किश्‍तों में निर्धारित अवधि में सम्‍बन्धित जिला परिषद द्वारा किया जावेगा। राज्‍य सरकार द्वारा समय-समय पर पंचायती राज संस्‍थाओं को उपलब्‍ध कराये जाने वाली अनुदान सहायता से ऋण का पुर्नभुगतान प्राथमिकता पर जिला परिषद द्वारा किया जावेगा। अनुदान सहायता का तात्‍पर्य है कि पंचायती राज संस्‍थाओं के व्‍ययं के संसाधनों एवं राज्‍य सरकार से एसएफसी(SFC), टीएफसी(TFC), अनटाईड फण्‍ड(Untied funds) आदि में दी जा रही अनुदान सहायता के अलावा राज्‍य सरकार की अतिरिक्‍त अनुदान सहायता है। यहां यह उल्‍लेखनीय है कि हुडको(HUDCO)से प्राप्‍त ऋण से जिला परिषद द्वारा लाभार्थी को इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर आवासीय सहायता उपलब्‍ध कराई जायेगी। हुडको(HUDCO)  से लिए गए ऋण के पुर्नभुगतान का दायित्‍व जिला परिषद का ही रहेगा, न कि लाभार्थी का। वित्‍त विभाग द्वारा हुडको(HUDCO)  को काउण्‍टर गारण्‍टी दी जावेगी एवं ऋण के पुर्नभुगतान हेतु जिला परिषद द्वारा हुडको के साथ एस्‍क्रो एकाउण्‍ट(ESCROW Account) का संधारण किया जायेगा, जिससे कि ऋण की किश्‍त का समयबद्ध भुगतान किया जा सके। जिला परिषद द्वारा हुडको(HUDCO)  से ऋण लेने, ऋण के पुर्नभुगतान समय पर करने एवं पुर्नभुगतान हेतु राज्‍य के वित्‍त विभाग से अनुदान समय से प्राप्‍त करने से सम्‍बन्धित समस्‍त कार्यवाही पंचायती राज विभाग की देखरेख में सम्‍पादित की जावेगी। राज्‍य स्‍तर पर वित्‍तीय प्रबन्‍ध से सम्‍बन्धित समस्‍त कार्यवाही के लिए पंचायती राज विभाग को नोडल विभाग होगा।

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सम्‍पूर्ण स्‍वच्‍छता अभियान

                    यह योजना भारत सरकार/राज्‍य सरकार द्वारा संयुक्‍त रूप से संचालित की जा रही है। योजना के तहत करौली जिले को वित्‍तीय वर्ष 2004-05 से 2008-09 तक भारत सरकार से 468.70 लाख रूपये एवं राज्‍य सरकार से 156.68 लाख रूपये प्राप्‍त हुए है। योजना मद में वर्ष 2008-09 तक कुल व्‍यय की गई राशि 322.89 लाख रूपये है तथा 521.05 लाख रूपये के उपयोगिता प्रमाण पत्र भारत सरकार/राज्‍य सरकार को प्रेषित कर दिए है एवं कुल प्राप्‍त बजट राशि के 76 प्रतिशत उपयोगिता प्रमाण पत्र/पूर्णता प्रमाण पत्र सीए ऑडिट करवाकर भारत सरकार/राज्‍य सरकार को भिजवा दिया गया है।

-:: योजना के उद्देश्‍य ::-

  • समुदाय एवं गांव की स्‍वच्‍छता
  • शाला शौचालय निर्माण एवं उपयोग
  • घर एवं भोजन की स्‍वच्‍छता
  • आंगनबाडी शौचालय निर्माण एवं उपयोग
  • मानव मल का सुरक्षित निपटान
  • सामुदायिक शौचालयों का निर्माण एवं उपयोग
  • पीने के पानी का रख-रखाब
  • गंदे पानी की निकासी
  • मातृ मृत्‍यु दर में कमीं लाना
  • कूडे कचने का सुरक्षित निपटान
  • शिशु मृत्‍यु दर में कमीं लाना
  • विद्यार्थियों में स्‍वच्‍छता के प्रति जागरूकता

 

योजनान्‍तर्गत बीपीएल परिवारों के व्‍यक्तिगत शौचालय निर्माण हेतु 2200/- रूपये प्रोत्‍साहन राशि का प्रावधान एवं 300/- रूपये लाभार्थी अंशदान है

सामुदायिक शौचालय हेतु देय राशि       :      2,00,000 रूपये (कार्यकारी एजेन्‍सी ग्राम पंचायत)

शाला शौचालय हेतु देय राशि            :      35,000 रूपये (विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति)

आंगनबाडी शौचालय हेतु देय राशि        :      8,000 रूपये (कार्यकारी एजेन्‍सी ग्राम पंचायत)

बी.पी.एल. शौचालय हेतु देय राशि         :       2,200 रूपये (कार्यकारी एजेन्‍सी स्‍वयं सेवी संस्‍था/ग्रा.पं;)

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पिछडा क्षेत्र अनुदान निधि कार्यक्रम
( बी.आर.जी.एफ.)

 - :::सामान्‍य परिचय ::: -

        पिछडा क्षेत्र विकास कोष योजना राज्‍य के 13 जिलों में प्रारम्‍भ की गई है, जो वर्ष 2006-07 से शुरू की गई है। जिसमें शत प्रतिशत राशि भारत सरकार द्वारा उपलब्‍ध करवाई जा रही है। इस योजना में करौली जिला भी सामिल किया गया है।

-:::: योजना के मुख्‍य लक्ष्‍य ::: -

-: उददेश्‍य :-

  1. पिछडा क्षेत्र अनुदान निधि ( बीआरजीएफ) - विकास के सम्‍वन्‍ध में क्षेत्रीय असुन्‍तलन दूर करने के लिये बनाई गई है। इस निधि का उददेश्‍य निर्धारित जिलों में निधि की कमी को पूरा करना तथा विकास के लिये वर्तमान समय में प्राप्‍त होने वाली अलग- अलग निधियों का एकीकरण करना है।

  1. आर. एस. वी. वाई. कार्यक्रम को बीआरजीएफ में शामिल किया गया है।

  2. पिछडा क्षेत्र अनुदान निधि ( बीआरजीएफ) - चिरकालिक क्षेत्रीय असुन्‍तलन दूर करने की दिशा में एक नवीन दृष्टिकोण का प्रतिपादन करती है जिसके अन्‍तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों को, शहरीय क्षेत्रों में नगरपालिकाओं को तथा जिला स्‍तर पर जिला योजना समितियों ( डीपीसी) को कार्यक्रम तैयार करने एवं पुन: कार्यान्वित करने के सम्‍वन्‍ध में केन्‍द्रीय भूमिका दी जाती है ताकि पंचायत एवं नगरपालिका स्‍तर की योजनाओं को जिला स्‍तर की योजना के रूप में समेकित किया जा सकें। बीआरजीएफ के तहत नियोजन प्रक्रिया में एक बडा वदलाव लाया गया है इसमें योजनायें शीर्श स्‍तर पर बनाकर नीचे के स्‍तरों पर लागू करने के बजाय जमीनी स्‍तर पर योजना वनाई जाती है और सहभागिता पूर्ण तरीकों से उपर के स्‍तर पर कार्यान्‍वयन के लिये कदम उठाये जाते है बीआरजीएफ का उददेश्‍य कार्यक्रम वार नियोजन के दायरे से बाहर निकलना है, अत: इसमें बीआरजीएफ योजना बनाने का विचार नहीं वल्कि एक जिला स्‍तर की योजना वनाने का विचार है। जिसमें निधियों के समस्‍त प्रवाह का ध्‍यान रखा जा सकें। आज केन्‍द्र तथा राज्‍य सरकारों की अनेक स्‍कीमों तथा गरीवी उपशमन, आधारिक संरचना में विकास तथा ग्रामीण रोजगार गारण्‍टी कार्यक्रम , राष्‍टीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन, आईसीडीएस, सर्वशिक्षा अभियान, मिड-डेमील कार्यक्रम, पेयजल आपूर्ति तथा स्‍वच्‍छता, प्रधानमन्‍त्री ग्राम सडक योजना, सिचाई विकास, राष्‍टीय कृषि विकास योजना तथा राष्‍टीय खाद्य सुरक्षा मिशन जैसी सेवा सुपुर्दगी के जरिये पर्याप्‍त संसाधन उपलब्‍ध है। बीआरजीएफ का उददेश्‍य इन कार्यक्रमों को जोडकर तथा उनका एकीकरण कर इनकी क्षमता वढाना है। एक वार एकीकरण योजना तैयार हो जाने पर बीआरजीएफ निधियों का स्‍तेमाल करते हुये उन आवश्‍यकताओं को पूरा किया जा सकेगा जो क्षेत्र विशिष्‍ट कार्यक्रमों द्वारा पूरी नहीं हो पा रही है।

  3.  सहभागी योजना तैयार करने के लिये पंचायत, नगरपालिका तथा निचले स्‍तर पर प्रभावकारी योजना तैयार करने तथा उन्‍हैं लागू करने के लिये क्षमता निर्माण करना अत्‍यावश्‍यक है। अत: बीआरजीएफ में पंचायती राज संस्‍थाओं तथा नगरपालिकाओं के क्षमता निर्माण के लिये एक विशिष्‍ट संघटक है जिसमें प्रति वर्ष 250 करोड रूपये का प्रावधान है जो वार्षिक परिवव्‍यय कर 5.3 प्रतिशत है। क्षमता निर्माण करते समय राज्‍यों के लिये एक ऐसा फ्रैमवर्क तैयार किया गया है जिसमें अत्‍यन्‍त व्‍यापक तौर पर क्षेमता निर्माण का प्रावधान है जिसमें पंचायत के निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिये प्रशिक्षण, हैड-होल्डिंग तथा माजूदा सहायता प्रदान करने की व्‍यवस्‍था है।

  4. बीआरजीएफ की दो विशेषतायें हैं जो दूसरे क्षेत्रीय ( सेक्‍टोरल) कार्यक्रमों की तुलना में कार्यक्रम के कार्यान्‍वयन पर नजर रखने की दिशा में भिन्‍न दृष्टिकोण प्रतिपादित करती है पहली विशेषता हैं सहभागी प्रक्रियाओं को शुरू करने में की जाने वाली कडाई जो कार्यक्रम का मुख्‍य परिणाम है क्‍योंकि इससे न सिर्फ बीआरजीएफ निधियों के व्‍यय की क्षमता प्रभावित होती हैं वल्कि पंचायत स्‍तर पर कार्यान्‍वित होने वाली दूसरी महत्‍वपूर्ण स्‍कीमों का व्‍यय भी प्रभावित होता है। दूसरी निधियों के उपयोग में आसानी से वदलाव किया जा सकता है जिससे यदि बीआरजीएफ निधियों का समझदारी तथा  सम्‍वेदनशीलता के साथ स्‍तेमाल किया जाये तो परिणाम एवं गुणवत्‍ता के दृष्टिकोण से बेहतरीन परिणाम प्राप्‍त किये जा सकते है।

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Typed by Data Entry Operator's Zila Parishad Karauli
Yogendra,LekhrajMehnaz,Imran,Rakesh,Ms Neeraj,& Ramkishan